श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.13.40 
नूनमुक्ता त्वरामीति पुनरेष्यामि तेऽन्तिकम्।
तेन कृष्णेन येनैषा त्वरिता पदपद्धति:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
यहाँ कृष्ण ने गोपी से कहा होगा, "[तुम यहाँ बैठो] मैं शीघ्र ही जा रहा हूँ [इस वन में रहने वाले राक्षस को मारकर] और तुम्हारे पास लौट आऊँगा। इसीलिए यहाँ उनके पैरों के चिह्न तीव्र गति के प्रतीत होते हैं।" ॥40॥
 
Here Krishna must have told the gopi, "[You sit here] I am going soon [after killing the demon living in this forest] and will return to you. That is why the marks of His feet here appear to be of a rapid movement." ॥40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)