श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.13.38 
हस्तन्यस्ताग्रहस्तेयं तेन याति तथा सखी।
अनायत्तपदन्यासा लक्ष्यते पदपद्धति:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
यहाँ वह सखी उसके हाथ में अपना हाथ रखकर चली गई है, इसलिए उसके पदचिह्न ऐसे प्रतीत होते हैं मानो वे किसी आश्रित पुरुष के हों। 38.
 
Here that friend has gone away after placing her hand in his hand, therefore her footprints appear as if they were of a dependent person. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)