श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.13.37 
अनुयातैनमत्रान्या नितम्बभरमन्थरा।
या गन्तव्ये द्रुतं याति निम्नपादाग्रसंस्थिति:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे सखियों! देखो, यहाँ कोई मन्दगति से चलने वाली गोपी अपने नितम्बों के भार से कृष्णचन्द्र के पीछे चली गई है। वह तीव्र गति से अपने गन्तव्य स्थान को गई है, इसीलिए उसके पैरों के चिह्नों का अग्रभाग थोड़ा नीचे दिखाई दे रहा है॥37॥
 
O friends! Look, here some slow-moving gopi has gone behind Krishnachandra due to the weight of her buttocks. She has gone to her destination at a fast pace, that is why the front part of her footprints are visible a little below. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)