श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.13.35 
अत्रोपविश्य वै तेन काचित्पुष्पैरलंकृता।
अन्यजन्मनि सर्वात्मा विष्णुरभ्यर्चितस्तया॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
यहाँ बैठकर उन्होंने अवश्य ही किसी सौभाग्यवती स्त्री को पुष्पों से अलंकृत किया है; उसने अवश्य ही पूर्वजन्म में परमात्मा श्रीविष्णु भगवान् की पूजा की होगी ॥35॥
 
Sitting here he has certainly adorned some fortunate lady with flowers; she must have certainly worshipped the Supreme Soul Sri Vishnu Bhagwan in her previous life. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)