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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना
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श्लोक 34
श्लोक
5.13.34
पुष्पापचयमत्रोच्चैश्चक्रे दामोदरो ध्रुवम्।
येनाग्राक्रान्तमात्राणि पदान्यत्र महात्मन:॥ ३४॥
अनुवाद
दामोदर ने यहीं खड़े होकर फूल तोड़े होंगे; इसीलिए उस महात्मा के चरणों के अग्रभाग ही यहाँ अंकित हैं ॥34॥
Damodar must have stood up and picked flowers here; that is why only the front parts of the feet of that great soul are imprinted here. ॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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