श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.13.3 
बालक्रीडेयमतुला गोपालत्वं जुगुप्सितम्।
दिव्यं च भवत: कर्म किमेतत्तात कथ्यताम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे भाई! आपकी अनोखी बाल लीलाएँ कहाँ हैं, वे निंदित ग्वाल-बाल कहाँ हैं और ये दिव्य कर्म कहाँ हैं? ये सब क्या हैं, कृपया हमें बताइए॥3॥
 
O dear brother! Where are your unique childhood pastimes, where are the condemned cowherds and where are these divine deeds? What are all these, please tell us.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)