श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.13.28 
अन्या ब्रवीति भो गोपा निश्शांकै: स्थीयतामिति।
अलं वृष्टिभयेनात्र धृतो गोवर्धनो मया॥ २८॥
 
 
अनुवाद
कोई दूसरी गोपी कहती, "अरे ग्वाल-बालों! मैंने गोवर्धन उठा लिया है। वर्षा से मत डरो। निडर होकर उसके नीचे आकर बैठ जाओ।"॥28॥
 
Some other gopi would say, "Oh, you cowherds! I have taken up Govardhan. Do not be afraid of the rain. Come and sit under it without any fear."॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)