श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.13.23 
गोपीपरिवृतो रात्रिं शरच्चन्द्रमनोरमाम्।
मानयामास गोविन्दो रासारम्भरसोत्सुक:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
गोपियों से घिरे हुए श्रीगोविंद ने रसारंभ रूप में रास करने के लिए उत्सुक होकर उस शरचचंद्र-सुशोभिता रात्रि का [रास प्रदर्शन द्वारा] सम्मान किया। 23॥
 
Surrounded by gopis, Shri Govind, eager for the Rasarambh form of Rasa, honored that Sharachchandra-sushobhita night [by performing Rasa]. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)