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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना
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श्लोक 20
श्लोक
5.13.20
काचिच्चावसथस्यान्ते स्थित्वा दृष्ट्वाबहिर्गुरुम्।
तन्मयत्वेन गोविन्दं दध्यौ मीलितलोचना॥ २०॥
अनुवाद
एक गोपी अपने गुरुओं को बाहर देखकर घर में ही रहने लगी और गहरी मनःस्थिति में आंखें बंद करके श्री गोविंद का ध्यान करने लगी।
One Gopi, after seeing her Gurus outside, stayed in her home and started meditating on Shri Govind with closed eyes in a deep state of mind.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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