श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.13.11 
यदि वोऽस्ति मयि प्रीति: श्लाघ्योऽहं भवतां यदि।
तदात्मबन्धुसदृशी बुद्धिर्व: क्रियतां मयि॥ ११॥
 
 
अनुवाद
यदि तुम मुझसे प्रेम करते हो और यदि मैं तुम्हारी स्तुति के योग्य हूँ, तो तुम मुझे अपना मित्र मानो ॥11॥
 
If you love me and if I am worthy of your praise, then you should consider me as your friend. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)