श्रीभगवानुवाच
मत्सम्बन्धेन वो गोपा यदि लज्जा न जायते।
श्लाघ्यो वाहं तत: किं वो विचारेण प्रयोजनम्॥ १०॥
अनुवाद
श्रीभगवान बोले - हे ग्वाल-बालों! यदि तुम सब लोग मेरे सम्बन्ध में कुछ भी लज्जा नहीं करते, तो फिर यह विचार करने की भी क्या आवश्यकता है कि मैं तुम्हारा वंदनीय हूँ?॥10॥
Sri Bhagavan said - O cowherds! If you all do not feel any shame in relation to me, then what is the need to even think about the fact that I am praiseworthy to you?॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥