श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.13.1 
श्रीपराशर उवाच
गते शक्रे तु गोपाला: कृष्णमक्लिष्टकारिणम्।
ऊचु: प्रीत्या धृतं दृष्ट्वा तेन गोवर्धनाचलम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - इन्द्र के चले जाने पर लीलाविहारी श्री कृष्णचन्द्र को बिना किसी प्रयास के गोवर्धन पर्वत उठाए जाते देखकर गोपगण उनसे प्रेमपूर्वक बोले - ॥1॥
 
Shri Parasharji said - After Indra left, seeing the leelavihari Shri Krishnachandra carrying the Govardhan mountain without any effort, the Gopas spoke to him lovingly - ॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)