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vishnu 5.11.7: हे मुनि! उस समय क्षण भर में ही बादलों द्वारा छोड़ी गई विशाल जलधाराओं से पृथ्वी, दिशाएँ और आकाश एक हो गए।   |   vishnu अध्याय 5.11: इन्द्रका कोप और श्रीकृष्णका गोवर्धन-धारण   ।   vishnu अंश 5: पंचम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 11: इन्द्रका कोप और श्रीकृष्णका गोवर्धन-धारण  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.11.7 
तत: क्षणेन पृथिवी ककुभोऽम्बरमेव च।
एकं धारामहासारपूरणेनाभवन्मुने॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे मुनि! उस समय क्षण भर में ही बादलों द्वारा छोड़ी गई विशाल जलधाराओं से पृथ्वी, दिशाएँ और आकाश एक हो गए।
 
O sage! At that time, in a moment, the earth, directions and sky became one with the huge streams of water released by the clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)