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vishnu 5.11.24: जब इन्द्र की प्रतिज्ञा भंग हुई और आकाश मेघरहित हो गया, तब सब गोकुलवासी प्रसन्नतापूर्वक वहाँ से निकलकर अपने-अपने स्थान को लौट गए॥24॥   |   vishnu अध्याय 5.11: इन्द्रका कोप और श्रीकृष्णका गोवर्धन-धारण   ।   vishnu अंश 5: पंचम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 11: इन्द्रका कोप और श्रीकृष्णका गोवर्धन-धारण  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.11.24 
व्यभ्रे नभसि देवेन्द्रे वितथात्मवचस्यथ।
निष्क्रम्य गोकुलं हृष्टं स्वस्थानं पुनरागमत्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जब इन्द्र की प्रतिज्ञा भंग हुई और आकाश मेघरहित हो गया, तब सब गोकुलवासी प्रसन्नतापूर्वक वहाँ से निकलकर अपने-अपने स्थान को लौट गए॥24॥
 
When Indra's promise was broken when the sky became cloudless, all the Gokul residents came out of there happily and returned to their respective places. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)