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vishnu 5.11.20: जहाँ व्रजवासी हर्ष और विस्मय से उनकी ओर देख रहे थे, वहीं श्री कृष्णचन्द्र भी अत्यन्त शान्त भाव से गिरिराज को धारण किए हुए थे॥20॥   |   vishnu अध्याय 5.11: इन्द्रका कोप और श्रीकृष्णका गोवर्धन-धारण   ।   vishnu अंश 5: पंचम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 11: इन्द्रका कोप और श्रीकृष्णका गोवर्धन-धारण  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.11.20 
कृष्णोऽपि तं दधारैव शैलमत्यन्तनिश्चलम्।
व्रजैकवासिभिर्हर्षविस्मिताक्षैर्निरीक्षित:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जहाँ व्रजवासी हर्ष और विस्मय से उनकी ओर देख रहे थे, वहीं श्री कृष्णचन्द्र भी अत्यन्त शान्त भाव से गिरिराज को धारण किए हुए थे॥20॥
 
While the people of Vraj were looking at him with joy and amazement, Shri Krishnachandra also kept holding Giriraj very calmly. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)