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vishnu 5.11.18: यहाँ आकर इस वायुरहित स्थान में सुखपूर्वक बैठो; निर्भय होकर प्रवेश करो; पर्वत आदि के गिरने का भय मत करो।॥18॥   |   vishnu अध्याय 5.11: इन्द्रका कोप और श्रीकृष्णका गोवर्धन-धारण   ।   vishnu अंश 5: पंचम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 11: इन्द्रका कोप और श्रीकृष्णका गोवर्धन-धारण  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.11.18 
सुनिवातेषु देशेषु यथा जोषमिहास्यताम्।
प्रविश्यतां न भेतव्यं गिरिपाताच्च निर्भयै:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यहाँ आकर इस वायुरहित स्थान में सुखपूर्वक बैठो; निर्भय होकर प्रवेश करो; पर्वत आदि के गिरने का भय मत करो।॥18॥
 
Come here and sit comfortably in this airless place; enter without fear; do not be afraid of the mountain falling etc.''॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)