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vishnu 5.11.15: अब मैं बड़े धैर्य के साथ इस विशाल चट्टानों से बने पर्वत को उखाड़कर व्रज के ऊपर एक बड़े छत्र की तरह धारण करूँगा॥15॥   |   vishnu अध्याय 5.11: इन्द्रका कोप और श्रीकृष्णका गोवर्धन-धारण   ।   vishnu अंश 5: पंचम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 11: इन्द्रका कोप और श्रीकृष्णका गोवर्धन-धारण  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.11.15 
इममद्रिमहं धैर्यादुत्पाटॺोरुशिलाघनम्।
धारयिष्यामि गोष्ठस्य पृथुच्छत्रमिवोपरि॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अब मैं बड़े धैर्य के साथ इस विशाल चट्टानों से बने पर्वत को उखाड़कर व्रज के ऊपर एक बड़े छत्र की तरह धारण करूँगा॥15॥
 
Now, with great patience I will uproot this mountain composed of huge rocks and hold it over Vraja like a large umbrella. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)