श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 10: शरद‍्वर्णन तथा गोवर्धनकी पूजा  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.10.6 
कुमुदैश्शरदम्भांसि योग्यतालक्षणं ययु:।
अवबोधैर्मनांसीव समत्वममलात्मनाम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जैसे शुद्ध पुरुषों के मन ज्ञान के द्वारा समता को प्राप्त होते हैं, वैसे ही शरद ऋतु का जल (अपनी स्वच्छता के कारण) कुमुदिनियों के साथ उचित संबंध स्थापित कर लेता है। ॥6॥
 
Just as the minds of pure men attain equanimity through knowledge, so the waters of autumn attain a proper relationship with the lilies [due to their cleanliness]. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)