श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 10: शरद‍्वर्णन तथा गोवर्धनकी पूजा  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.10.37 
मन्त्रयज्ञपरा विप्रास्सीरयज्ञाश्च कर्षका:।
गिरिगोयज्ञशीलाश्च वयमद्रिवनाश्रया:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण मन्त्रयज्ञ करते हैं और कृषक सीरयज्ञ (प्रकाश पूजा) करते हैं, अतः हम पर्वतों और वनों में रहने वालों को गिरियज्ञ और गोयज्ञ करना चाहिए ॥37॥
 
Brahmins perform Mantra Yagya and farmers perform Seerayagya (light puja), hence we who live in mountains and forests should perform Giriyagya and Goyagya. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)