श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 10: शरद‍्वर्णन तथा गोवर्धनकी पूजा  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.10.36 
गिरियज्ञस्त्वयं तस्माद‍्गोयज्ञश्च प्रवर्त्यताम्।
किमस्माकं महेन्द्रेण गावश्शैलाश्च देवता:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
अतः आज से [इस इन्द्रयज्ञ के स्थान पर] गिरियज्ञ या गोयज्ञ का प्रचार करना चाहिए। हमें इन्द्र से क्या चाहिए? हमारे देवता तो गौएँ और पर्वत ही हैं। 36॥
 
Therefore, from today onwards, Giriyagya or Goyagya should be promoted [in place of this Indrayagya]. What do we need from Indra? Our gods are cows and mountains only. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)