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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 10: शरद्वर्णन तथा गोवर्धनकी पूजा
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श्लोक 35
श्लोक
5.10.35
यदा चैतै: प्रबाध्यन्ते तेषां ये काननौकस:।
तदा सिंहादिरूपैस्तान्घातयन्ति महीधरा:॥ ३५॥
अनुवाद
जब भी वनवासी इन गिरिदेवों को किसी प्रकार का कष्ट पहुँचाते हैं, तब वे सिंह का रूप धारण करके उनका वध कर देते हैं ॥35॥
Whenever the forest dwellers cause any kind of disturbance to these Giridevas, they take the form of lions and kill them. ॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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