श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 10: शरद‍्वर्णन तथा गोवर्धनकी पूजा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.10.27 
आन्वीक्षिकी त्रयी वार्त्ता दण्डनीतिस्तथा परा।
विद्या चतुष्टयं चैतद्वार्त्तामात्रं शृणुष्व मे॥ २७॥
 
 
अनुवाद
आन्वीक्षिकी (तर्क), त्रयी (अनुष्ठान), दण्डनीति और वार्ता- ये चार विद्याएँ हैं, वार्ता का ही वर्णन सुनो ॥27॥
 
Anvikshiki (logic), Trayi (rituals), Dandaniti and Varta - these are the four sciences, listen to the description of Varta only. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)