श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 10: शरद‍्वर्णन तथा गोवर्धनकी पूजा  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.10.25 
श्रीपराशर उवाच
नन्दगोपस्य वचनं श्रुत्वेत्थं शक्रपूजने।
रोषाय त्रिदशेन्द्रस्य प्राह दामोदरस्तदा॥ २५॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले - इन्द्र की पूजा के विषय में नन्द के मुख से ऐसे वचन सुनकर श्री दामोदर देवराज को क्रोधित करने के लिए इस प्रकार कहने लगे -॥ 25॥
 
Sri Parashara said - Having heard such words from Nanda regarding the worship of Indra, Sri Damodar began to speak thus to enrage the King of Gods -॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)