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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 10: शरद्वर्णन तथा गोवर्धनकी पूजा
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श्लोक 22
श्लोक
5.10.22
नासस्या नातृणा भूमिर्न बुभुक्षार्दितो जन:।
दृश्यते यत्र दृश्यन्ते वृष्टिमन्तो बलाहका:॥ २२॥
अनुवाद
जिस भूमि पर वर्षा करने वाले बादल दिखाई देते हैं, वहाँ कभी अन्न और घास की कमी नहीं होती और न ही वहाँ के लोग कभी भूखे देखे जाते हैं ॥22॥
The land where rain-bearing clouds are seen never faces a dearth of food grains and grass, nor are its people ever seen to remain hungry. ॥22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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