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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 10: शरद्वर्णन तथा गोवर्धनकी पूजा
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श्लोक 20
श्लोक
5.10.20
तद्वृष्टिजनितं सस्यं वयमन्ये च देहिन:।
वर्त्तयामोपयुञ्जानास्तर्पयामश्च देवता:॥ २०॥
अनुवाद
हम और अन्य सभी प्राणी उस वर्षा से उत्पन्न अन्न का सेवन करते हैं और उसका उपयोग करके देवताओं को भी संतुष्ट करते हैं ॥20॥
We and all other living beings consume the food produced by that rain and by using it, we satisfy the gods as well. ॥20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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