श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 10: शरद‍्वर्णन तथा गोवर्धनकी पूजा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.10.17 
कृष्णस्तानुत्सुकान्दृष्ट्वा गोपानुत्सवलालसान्।
कौतूहलादिदं वाक्यं प्राह वृद्धान्महामति:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उत्सव के लिए उत्साह से भरे हुए उन ग्वालों को देखकर महामति कृष्ण ने जिज्ञासावश अपने अग्रजों से पूछा-॥17॥
 
Seeing those cowherds filled with enthusiasm for the festival, Mahamati Krishna out of curiosity asked his elders -॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)