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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 87
श्लोक
5.1.87
ते सर्वे सर्वदा भद्रे मत्प्रसादादसंशयम्।
असन्दिग्धा भविष्यन्ति गच्छ देवि यथोदितम्॥ ८७॥
अनुवाद
मेरी कृपा से तुम्हारे द्वारा दी गई सभी मनोकामनाएँ अवश्य पूर्ण होंगी। हे देवी! अब तुम मेरे द्वारा बताए गए स्थान पर जाओ। 87।
All the wishes given by you will surely be fulfilled by my grace. O Devi! Now go to the place told by me. 87.
इति श्रीविष्णुपुराणे पञ्चमेंऽशे प्रथमोऽध्याय:॥ १॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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