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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 81
श्लोक
5.1.81
ततस्त्वां शतदृक्छक्र: प्रणम्य मम गौरवात्।
प्रणिपातानतशिरा भगिनीत्वे ग्रहीष्यति॥ ८१॥
अनुवाद
उस समय सहस्र नेत्रों वाला इन्द्र बिना सिर झुकाए और मुझे प्रणाम किए तुम्हें अपनी बहन मान लेगा ॥81॥
At that time, the thousand-eyed Indra will accept you as his sister without bowing his head and paying obeisance to me. 81॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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