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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 63
श्लोक
5.1.63
तत: क्षयमशेषास्ते दैतेया धरणीतले।
प्रयास्यन्ति न सन्देहो मद्दृक्पातविचूर्णिता:॥ ६३॥
अनुवाद
तब निःसंदेह पृथ्वीपर स्थित समस्त राक्षस मेरी दृष्टिसे दुर्बल हो जायेंगे ॥63॥
Then without any doubt, all the demons on the earth will become weak due to my glance. 63॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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