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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 26
श्लोक
5.1.26
अक्षौहिण्योऽत्र बहुला दिव्यमूर्त्तिधरास्सुरा:।
महाबलानां दृप्तानां दैत्येन्द्राणां ममोपरि॥ २६॥
अनुवाद
हे दिव्य मूर्तियों! इस समय बलवान एवं अभिमानी राक्षस राजाओं की अनेक अक्षौहिणी सेनाएँ मेरे ऊपर हैं। 26॥
Oh divine idols! At this time, many Akshauhini armies of powerful and proud demon kings are above me. 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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