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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 21
श्लोक
5.1.21
तथाप्यनेकरूपस्य तस्य रूपाण्यहर्निशम्।
बाध्यबाधकतां यान्ति कल्लोला इव सागरे॥ २१॥
अनुवाद
तथापि, विष्णु के ये अनेक रूप समुद्र की लहरों के समान दिन-रात एक-दूसरे को बाँधते और रोकते रहते हैं ॥21॥
However, these many forms of Vishnu, like the waves of the ocean, continue to bind and obstruct one another day and night. ॥21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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