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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 13
श्लोक
5.1.13
सब्रह्मकान्सुरान्सर्वान्प्रणिपत्याथ मेदिनी।
कथयामास तत्सर्वं खेदात्करुणभाषिणी॥ १३॥
अनुवाद
वहाँ उसने ब्रह्मा सहित सभी देवताओं को प्रणाम किया और खेदपूर्ण तथा दुःखी स्वर में अपनी सारी कहानी सुनाई।
There she bowed to all the gods including Brahma and narrated her entire story in a regretful and sad voice.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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