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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 10
श्लोक
5.1.10
न हन्तव्या महाभाग देवकी भवतानघ।
समर्पयिष्ये सकलान्गर्भानस्योदरोद्भवान्॥ १०॥
अनुवाद
हे महात्मन! हे निष्पाप! देवकी को मत मारो; मैं उसके गर्भ से उत्पन्न सभी बालकों को तुम्हें सौंप दूँगा।॥10॥
"O great one! O sinless one! Do not kill Devaki; I will hand over to you all the children born from her womb."॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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