vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 4: चतुर्थ अंश
»
अध्याय 9: महाराज रजि और उनके पुत्रोंका चरित्र
»
श्लोक 1
श्लोक
4.9.1
श्रीपराशर उवाच
रजेस्तु पञ्च पुत्रशतान्यतुलबलपराक्रमसाराण्यासन्॥ १॥
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - राजी के पाँच सौ पुत्र थे जो अतुलित बल और पराक्रम वाले थे ॥1॥
Shri Parasharji said – Raji had five hundred sons with incomparable strength and bravery. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×