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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 8: काश्यवंशका वर्णन
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श्लोक 13
श्लोक
4.8.13
तेन च प्रीतिमतात्मपुत्रो वत्सवत्सेत्यभिहितो वत्सोऽभवत्॥ १३॥
अनुवाद
दिवोदास अपने पुत्र (प्रतर्दन) को बड़े प्रेम से 'वत्स, वत्स' कहकर पुकारते थे; इसलिए उनका नाम 'वत्स' हो गया।॥ 13॥
Divodāsa called his son (Pratardana) 'Vatsa, Vatsa' with great love; hence his name became 'Vatsa'.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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