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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 8: काश्यवंशका वर्णन
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श्लोक 11
श्लोक
4.8.11
तस्य च धन्वन्तरे: पुत्र: केतुमान् केतुमतो भीमरथस्तस्यापि दिवोदासस्तस्यापि प्रतर्दन:॥ ११॥
अनुवाद
धन्वंतरि के पुत्र केतुमान, केतुमान के पुत्र भीमरथ, भीमरथ के पुत्र दिवोदास और दिवोदास के पुत्र प्रतर्दन थे। 11।
Dhanvantari's son was Ketuman, Ketuman's son was Bhimrath, Bhimrath's son was Divodas and Divodas's son was Pratardan. 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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