vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 4: चतुर्थ अंश
»
अध्याय 7: जह्नुका गंगापान तथा जमदग्नि और विश्वामित्रकी उत्पत्ति
»
श्लोक 5
श्लोक
4.7.5
अथैनं देवर्षय: प्रसादयामासु:॥ ५॥ दुहितृत्वे चास्य गङ्गामनयन्॥ ६॥
अनुवाद
तब देवताओं के ऋषियों ने उन्हें प्रसन्न करके गंगा को अपनी पुत्री के रूप में पाया और उन्हें अपने साथ ले गए ॥5-6॥
Then the sages of the gods pleased him and found Ganga as his daughter and took her away. ॥ 5-6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×