श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 6: सोमवंशका वर्णन; चन्द्रमा, बुध और पुरूरवाका चरित्र  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  4.6.32 
कथय वत्से कस्यायमात्मज: सोमस्य वा बृहस्पतेर्वा इत्युक्ता लज्जमानाह सोमस्येति॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
"बेटी! मुझे ठीक-ठीक बताओ कि यह किसका पुत्र है - बृहस्पति का या चन्द्रमा का?" इस पर उसने शरमाते हुए उत्तर दिया - "चन्द्रमा का।" 32.
 
"Daughter! Tell me exactly whose son is this-Jupiter's or the Moon's?" To this he replied shyly-"Moon's." 32.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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