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श्लोक 4.5.8  |
| तत्कर्मकर्तृत्वं च गौतमस्य दृष्ट्वा स्वपते तस्मै राज्ञे मां प्रत्याख्यायैतदनेन गौतमाय कर्मान्तरं समर्पितं यस्मात्तस्मादयं विदेहो भविष्यतीति शापं ददौ॥ ८॥ |
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| अनुवाद |
| उस यज्ञ में गौतम को अपना [होतक का] कर्तव्य निभाते देख उन्होंने सोये हुए राजा निमिक को शाप दिया कि ‘चूँकि इसने मेरी आज्ञा का उल्लंघन करके अनुष्ठान का सम्पूर्ण भार गौतम को सौंप दिया है, इसलिए यह अपना शरीर खो देगा।’ ॥8॥ |
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| Seeing Gautama performing his [Hotaka's] duty in that sacrifice, he cursed the sleeping King Nimik that 'Since he has disobeyed me and entrusted the entire responsibility of the ritual to Gautama, he will lose his body.' ॥ 8॥ |
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