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श्लोक 4.5.34  |
| प्रायेणैते आत्मविद्याश्रयिणो भूपाला भवन्ति॥ ३४॥ |
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| अनुवाद |
| सामान्यतः ये सभी राजा आत्मज्ञान को आश्रय देने वाले ही हैं ॥34॥ |
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| Generally all these kings are those who give shelter to self-knowledge. ॥ 34॥ |
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| इति श्रीविष्णुपुराणे चतुर्थेंऽशे पञ्चमोऽध्याय:॥ ५॥ |
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