श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 5: निमि-चरित्र और निमिवंशका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  4.5.32 
कृतौ सन्तष्ठतेऽयं जनकवंश:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
इस कृत्य में ही इस जनक का वंश समाप्त हो जाता है ॥32॥
 
In the act itself the lineage of this Janaka comes to an end. ॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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