| श्री विष्णु पुराण » अंश 4: चतुर्थ अंश » अध्याय 5: निमि-चरित्र और निमिवंशका वर्णन » श्लोक 30 |
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| | | | श्लोक 4.5.30  | | सीरध्वजस्यापत्यं भानुमान् भानुमतश्शतद्युम्न: तस्य तु शुचि: तस्माच्चोर्जनामा पुत्रो जज्ञे॥ ३०॥ तस्यापि शतध्वज:, तत: कृति: कृतेरञ्जन:, तत्पुत्र: कुरुजित् ततोऽरिष्टनेमि: तस्माच्छ्रुतायु: श्रुतायुष: सुपार्श्व: तस्मात्सृञ्जय:, तत: क्षेमावी क्षेमाविनोऽनेना: तस्माद्भौमरथ:, तस्य सत्यरथ:, तस्मादुपगुरुपगोरुपगुप्त:, तत्पुत्र: स्वागतस्तस्य च स्वानन्द:, तस्माच्च सुवर्चा:, तस्य च सुपार्श्व:, तस्यापि सुभाष:, तस्य सुश्रुत: तस्मात्सुश्रुताज्जय: तस्य पुत्रो विजयो विजयस्य ऋत:, ऋतात्सुनय: सुनयाद्वीतहव्य: तस्माद्धृतिर्धृतेर्बहुलाश्व:, तस्य पुत्र: कृति:॥ ३१॥ | | | | | | अनुवाद | | सीरध्वज का भानुमान नामक पुत्र हुआ। भानुमान का शतद्युम्न, शतद्युम्न का शुचि, शुचिके ऊर्जानामा, ऊर्जानामा का शतध्वज, शतध्वजके कृति, कृति का अंजन, अंजनके कुरुजित, कुरुजित का अरिष्टनेमि, अरिष्टनेमिके श्रुतायु, श्रुतयुके सुपार्श्व, सुपार्श्वके सृंजय, सृंजयके क्षेमवि, क्षेमविक्के अनेना, अनेना का भौमरथ, भौमरथ का सत्यरथ, सत्यरथ का उपगु, उपगुक का उपगुप्त, उपगुप्त का स्वागत, स्वागत का स्वानंद, स्वानंद का सुवर्चा, सुवर्चा का सुपार्श्व, सुपार्श्व का सुभाष, सुभाष का सुश्रुत, सुश्रुत का जय, जयके विजय, विजय का ऋत, ऋतके सुनय, सुनय का वीतहव्य, वीतहव्य के धृति, धृतिके बहुलाश्व और बहुलाश्व के कृति नामक पुत्र हुआ। 30-31. | | | | Siradhwaj had a son named Bhanuman. Bhanuman's Shatadyumna, Shatadyumna's Shuchi, Shuchike Urjanama, Urjanama's Shatdhwaja, Shatadhwajake Kriti, Kriti's Anjan, Anjanke Kurujit, Kurujit's Arishtanemi, Arishtanemike Shrutayu, Shrutayuke Suparshva, Suparshvake Srinjay, Srinjayke Kshemaavi, Kshemavikke Anena, Anena's Bhaumrath, Bhaumrath's Satyarath, Satyarath's Upagu, Upaguka's Upagupta, Upagupta's welcome, Swagat's Swanand, Swanand's Suvarcha, Suvarcha's Suparshva, Suparshva's Subhash, Subhash's Sushruta, Sushruta's Jai, Jayke Vijay, Vijay's Rita, Ritke Sunay, Sunay's Veethavya, Veethavya's Dhriti, Dhritike Bahulashva and Bahulashva had a son named Kriti. 30-31. | | ✨ ai-generated | | |
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