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श्लोक 4.5.13  |
| निमेरपि तच्छरीरमतिमनोहरगन्धतैलादिभिरुपसंस्क्रियमाणं नैव क्लेदादिकं दोषमवाप सद्यो मृत इव तस्थौ॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| अत्यन्त सुखद गंध और तेल आदि से सुरक्षित रहने के कारण निमिका का शरीर सड़ता नहीं था, अपितु तुरंत ही मृत शरीर के समान हो जाता था ॥13॥ |
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| Because of being protected by a very pleasant smell and oil etc., the body of Nimika did not decay but immediately became like a dead body. ॥13॥ |
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