श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 5: निमि-चरित्र और निमिवंशका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.5.13 
निमेरपि तच्छरीरमतिमनोहरगन्धतैलादिभिरुपसंस्क्रियमाणं नैव क्लेदादिकं दोषमवाप सद्यो मृत इव तस्थौ॥ १३॥
 
 
अनुवाद
अत्यन्त सुखद गंध और तेल आदि से सुरक्षित रहने के कारण निमिका का शरीर सड़ता नहीं था, अपितु तुरंत ही मृत शरीर के समान हो जाता था ॥13॥
 
Because of being protected by a very pleasant smell and oil etc., the body of Nimika did not decay but immediately became like a dead body. ॥13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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