श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 5: निमि-चरित्र और निमिवंशका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.5.11 
तच्छापाच्च मित्रावरुणयोस्तेजसि वसिष्ठस्य चेत: प्रविष्टम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
राजा निमिका के शाप से वसिष्ठजी का लिंग मित्रावरुण के वीर्य में प्रवेश कर गया ॥11॥
 
Due to the curse of King Nimika, Vasisthaji's penis entered into the semen of Mitravaruna. 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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