vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 4: चतुर्थ अंश
»
अध्याय 3: मान्धाताकी सन्तति, त्रिशंकुका स्वर्गारोहण तथा सगरकी उत्पत्ति और विजय
»
श्लोक 49
श्लोक
4.3.49
सगरोऽपि स्वमधिष्ठानमागम्यास्खलितचक्रस्सप्तद्वीपवतीमिमामुर्वीं प्रशशास॥ ४९॥
अनुवाद
तत्पश्चात् महाराज सगर अपनी राजधानी में आकर अजेय सेना के साथ सम्पूर्ण सप्तद्वीपवती पृथ्वी पर शासन करने लगे ॥49॥
Thereafter, Maharaj Sagar came to his capital and started ruling the entire Saptadvipavati earth with an invincible army. 49॥
इति श्रीविष्णुपुराणे चतुर्थेंऽशे तृतीयोऽध्याय:॥ ३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×