श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 3: मान्धाताकी सन्तति, त्रिशंकुका स्वर्गारोहण तथा सगरकी उत्पत्ति और विजय  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  4.3.47 
यवनान्मुण्डितशिरसोऽर्द्धमुण्डिताञ्‍च्छकान् प्रलम्बकेशान् पारदान् पह्लवाञ्श्मश्रुधरान् निस्स्वाध्यायवषट्कारानेतानन्यांश्च क्षत्रियांश्चकार॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
उसने यवनों के सिर मुंडवा दिए, शकों के आधे मुंडवा दिए, पारदों को लंबे बाल रखने दिए, पहलवों को मूंछ और दाढ़ी रखने दी तथा इन तथा इनके जैसे अन्य क्षत्रियों को स्वाध्याय तथा वषट्कार आदि से निष्कासित कर दिया।
 
He got the heads of the Yavanas shaved, the Shakas half-shaved, the Paradas kept long hair, the Pahlavas kept moustaches and beards and expelled these and other Kshatriyas like them from self-study and from Vashatkaara etc.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)