श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 3: मान्धाताकी सन्तति, त्रिशंकुका स्वर्गारोहण तथा सगरकी उत्पत्ति और विजय  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  4.3.42 
शकयवनकाम्बोजपारदपह्लवा: हन्यमानास्तत्कुलगुरुं वसिष्ठं शरणं जग्मु:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
उनके बाद शक, यवन, काम्बोज, पारद और पह्लवगण भी मारे गये और सगर के कुलगुरु वसिष्ठजी की शरण में गये ॥42॥
 
After them, Shaka, Yavana, Kamboja, Parad and Pahlavagan also got casualties and went to the refuge of Vasisthaji, the patriarch of Sagar. 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)