श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 3: मान्धाताकी सन्तति, त्रिशंकुका स्वर्गारोहण तथा सगरकी उत्पत्ति और विजय  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  4.3.31 
अथैतामतीतानागतवर्त्तमानकालत्रयवेदी भगवानौर्वस्स्वाश्रमान्निर्गत्याब्रवीत्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उसी समय भूत, भविष्य और वर्तमान को जानने वाले भगवान और्व उसके आश्रम से बाहर आये और उससे बोले- 31॥
 
At the same time, Lord Aurva, who knows the past, future and present, came out of his ashram and said to him - 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)