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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 3: मान्धाताकी सन्तति, त्रिशंकुका स्वर्गारोहण तथा सगरकी उत्पत्ति और विजय
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श्लोक 31
श्लोक
4.3.31
अथैतामतीतानागतवर्त्तमानकालत्रयवेदी भगवानौर्वस्स्वाश्रमान्निर्गत्याब्रवीत्॥ ३१॥
अनुवाद
उसी समय भूत, भविष्य और वर्तमान को जानने वाले भगवान और्व उसके आश्रम से बाहर आये और उससे बोले- 31॥
At the same time, Lord Aurva, who knows the past, future and present, came out of his ashram and said to him - 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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