श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 3: मान्धाताकी सन्तति, त्रिशंकुका स्वर्गारोहण तथा सगरकी उत्पत्ति और विजय  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.3.18 
अनरण्यस्य पृषदश्व: पृषदश्वस्य हर्यश्व: पुत्रोऽभवत्॥ १८॥ तस्य च हस्त: पुत्रोऽभवत्॥ १९॥ ततश्च सुमनास्तस्यापि त्रिधन्वा त्रिधन्वनस्त्रय्यारुणि:॥ २०॥ त्रय्यारुणेस्सत्यव्रत:, योऽसौ त्रिशङ्कुसंज्ञामवाप॥ २१॥
 
 
अनुवाद
अनरण्यके पृषदश्व नाम के पुत्र हुए, पृषदश्वके हर्यश्व नाम के पुत्र हुए, हर्यश्वके हस्त नाम के पुत्र हुए, हस्तके सुमना नाम के पुत्र हुए, सुमना के त्रिधन्वा नाम के पुत्र हुए, त्रिधन्वा के त्रय्यारुणि नाम के पुत्र हुए और त्रय्यारुणिके सत्यव्रत नाम के पुत्र हुए, जो आगे चलकर त्रिशंकु नाम से प्रसिद्ध हुए । 18-21॥
 
Anaranya had a son named Prishadashva, Prishadashva had a son named Haryashva, Haryashwa had a son named Hasta, Hasta had a son named Sumana, Sumana had a son named Tridhanva, Tridhanva had a son named Trayyaruni and Trayyaruni had a son named Satyavrat, who later came to be known as Trishanku. 18-21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)