श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 3: मान्धाताकी सन्तति, त्रिशंकुका स्वर्गारोहण तथा सगरकी उत्पत्ति और विजय  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  4.3.15 
पुरुकुत्साय सन्ततिविच्छेदो न भविष्यतीत्युरगपतयो वरं ददु:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
नागों के राजाओं ने पुरुकुत्सा को आशीर्वाद दिया कि उसकी संतान कभी समाप्त नहीं होगी।15.
 
The kings of the serpents blessed Purukutsa that his progeny would never end. 15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)